ISC Hindi 2016 Class-12 Previous Year Question Papers

बालश्रम की समस्या विकासशील देशों में अधिक पायी जाती है। विकासशील देशों में गरीबी के कारण बच्चों को कम उम्र में ही मजदूरी, घरों में काम आदि करना पड़ता है। जिसके कारण वे अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक स्वतन्त्रता तथा अपने बचपन से वंचित रह जाते हैं। दुनिया के सभी विकासशील देश इस समस्या को . सुलझाने का भरसक प्रयत्न कर रहे हैं, लेकिन चोरी-छिपे यह रोजगार धड़ल्ले से चल रहा है। समाज का बड़ा तबका बाल श्रम का भरपूर फायदा ले रहा है। लाखों बच्चे बालश्रम की चपेट में आकर अपना जीवन चौपट कर रहे हैं। ये बच्चे ही भारत का भविष्य हैं जो बिगड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। भारतीय कानून के अन्तर्गत 15 साल से कम के बच्चों से काम लेना जुर्म है। ये जुर्म बच्चों के माता-पिता, कारखानों के मालिक, रेस्टोरेन्ट के मालिक और घर के मालिक, दुकानदार, दस्तकार, बुक बाइंडर आदि खुले रूप से कर रहे हैं। जिससे बच्चों का जीवन नष्ट हो रहा है और इसकी चिन्ता किसी को नहीं है।

बालश्रम बढ़ने के निम्न कारण हैं जो इस श्रम को कम नहीं होने देते-    (ISC Hindi 2016 Class-12)

  1. गरीबी और बढ़ती हुई बेरोजगारी विकासशील देशों में बालश्रम को जन्म दे रही है।
  2. विश्व संगठन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के एकचौथाई लोग अत्यन्त गरीब हैं।
  3. शिक्षा की कमी है जिसे अधिकतर बच्चे प्राप्त नहीं कर पाते।
  4. विकासशील देश के लोग बालश्रम के कानून को तोड़कर बालश्रम को बढ़ावा दे रहे हैं।
  5. समाज का पूर्ण नियन्त्रण खेती पर काम करने वाले बच्चों पर और घर में काम करने वाले बच्चों पर नहीं है।
  6. बालश्रम करने वाले बच्चे अपने परिवार की दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए इसे महत्व देते हैं और इसके ऊपर वे कुछ और सोचते ही नहीं हैं।
  7. व्यापारिक संगठन और गृह उद्योग छोटे बच्चों को नौकरी पर रख लेते हैं, ताकि कम कीमत में ज्यादा काम ले सकें। वे बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं और छोटे बच्चे उसी को अपना भाग्य मानकर स्वीकार कर लेते हैं।

बाल श्रम की समस्या को सुलझाने के लिए उपाय-    (ISC Hindi 2016 Class-12)

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  1. समाज में फैली इस कुप्रथा को बन्द करने के लिए हमें नये सिरे से प्रयास करने होंगे।
  2. बालश्रम को समाप्त करने के लिए समाज में ऐसी इकाइयाँ बनें जो बालकों के श्रम पर ध्यान देकर बालकों को उस काम के प्रति निरुत्साहित करें और उनके पढ़ने की निःशुल्क व्यवस्था करें।
  3. बच्चों के माता-पिता को उनकी पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें।
  4. समाज में जागृति उत्पन्न की जाये जिसका परिणाम बाल श्रम से छुटकारा हो।
  5. सरकार उन गरीब परिवारों की कुछ आर्थिक सहायता करे जिनके बच्चे गरीबी के कारण बालश्रम में लग जाते हैं।
  6. सरकार बालश्रम समाप्ति के लिए कड़े कानून बनाये जिसमें माता-पिता और जहाँ बच्चे काम करते हैं उनको दण्ड देने का प्रावधान हो।

भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी जिन्होंने बाल श्रम को रोकने के लिए अपना पूर्ण सहयोग दिया तथा इसके लिए उन्हें विश्व का सर्वश्रेष्ठ सम्मान ‘नोबेल पुरस्कार’ मिला। ये मध्य प्रदेश में पैदा हुए और अपनी शिक्षक की नौकरी त्यागकर ‘बालश्रम’ की समाप्ति के कार्य में लग गये। 1980 में इन्होंने ‘बचपन बचाओ’ आन्दोलन चलाया। 144 देशों में इन्होंने लगभग 83,000 बच्चों को बालश्रम से उबारा और उनकी शिक्षा आदि का भी सरकारों के सहयोग से प्रबन्ध किया।

बालश्रम एक बड़ी सामाजिक समस्या है। इसको माता-पिता, अध्यापक, सामाजिक कार्यकर्ता और सरकार मिलकर सुलझा सकते हैं। बच्चों को शिक्षित बनाया जाये और उनकी कमाने वाली मानसिकता को सुधारा जाये।

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‘अहंकार से वृद्धि रुक जाती है’      (ISC Hindi 2016 Class-12)

‘अहंकार से वृद्धि रुक जाती है’ यह उक्ति अक्षरशः सत्य है। अहंकार एक ऐसा अवगुण है जो मनुष्य के हृदय और मस्तिष्क पर हावी रहता है और उसे उसका भान भी नहीं होता। वह उसके मार्ग में प्रतिपग बाधा उत्पन्न करता है। अन्य मनुष्य ही समझ पाते हैं कि अमुक मनुष्य अहंकारी है अतः वे उससे दूरी बनाकर रखते हैं। अहंकार न दिखाई देते हुए भी स्पष्ट परिलक्षित हो जाता है। अहंकार अहंकारी व्यक्ति को भरोसा दिलाता है कि उसके सब काम अहंकार के कारण ही होंगे पर होता इसके विपरीत ही है। मनुष्य का जीवन अपने आस-पास के वातावरण से प्रभावित होता है। मूलरूप से मानव के विचारों और कार्यों को उसके संस्कार, वंश परम्पराएँ ही दिशा दे सकती हैं, अहंकार नहीं। यदि उसे अच्छा वातावरण मिलता है तो वह श्रेष्ठ कार्यों को सम्पादित करता है। यदि अपने अहंकार के कारण उसे उचित वातावरण सुलभ नहीं हो पाता है तो उसके कार्य भी उससे प्रभावित होते हैं।

प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व उसकी जीवन शैली और आचरण के रूप में प्रतिबिम्बित होता है। यदि मनुष्य का आचरण नैतिकता के अनुरूप है तो उस मनुष्य की सामाजिक प्रतिष्ठा अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन जाती है और वह व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है। इसके विपरीत यदि मनुष्य का आचरण सामाजिक, सांस्कृतिक, वैधानिक, धार्मिक नियमों के प्रतिकूल और अहंकार से प्रभावित है तो वह समाज में अपमान का पात्र होता है। अतः मनुष्य का जीवन अहंकार हीन और सदाचार में अधिक महत्व रखता है। सदाचार का जीवन में विशेष महत्व है। यदि मनुष्य का आचरण सत्य पर आधारित हो तो मनुष्य, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं भौतिक रूप से समृद्ध रहता है।

अहंकार और दम्भ मनुष्य को यह दर्शाते हैं कि वह सभी मनुष्यों से श्रेष्ठ है और अपने बलबूते पर ही सब काम कर सकता है। यह अभिमान उसके कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है। ईश्वर भी अपने भक्तों में अभिमान के अंकुर फूटने नहीं देता। जहाँ अभिमान प्रतिष्ठापित है वहाँ ईश्वर का निवास नहीं होता;

जैसे-

“जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहि।”    (ISC Hindi 2016 Class-12)

भगवान ने नारद के अभिमान को मायानगरी बनाकर नष्ट किया। बाली को अपने बल पर अभिमान था, पर श्रीराम ने उसे मारकर उसका अहंकार तोड़ दिया। एक बार गरुड़ को अपनी गति का अभिमान हुआ था। वह हनुमान जी को बुलाने गये और चाहते थे कि हनुमान जी उनकी पीठ पर बैठकर चलें तो शीघ्र रामजी के पास पहुँच जायेंगे। हनुमानजी ने उनके साथ जाने को मनाकर दिया और कहा कि ‘मैं आता हूँ।’ वापिस लौटने पर गरुड़ ने रामजी के पास जाकर देखा कि हनुमान जी रामजी से वार्ता करके लौट रहे हैं। तब वह अपनी गति के अभिमान पर लज्जित हुआ। इन प्रसंगों से पता चलता है कि अहंकार सबके कार्यों में बाधा डालता है।

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मुझे भी कई बार यह अभिमान हुआ कि मैं सभी छात्रों से अधिक बुद्धिमान हूँ। इसका परिणाम यह हुआ कि मेरे मित्र भी मुझसे दूरी बनाने लगे। मुझे किसी का सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। मैं अपनी कक्षा में भी पिछड़ने लगा। तब मेरे एक हितैषी अध्यापक ने बड़े प्रेम से मुझे समझाया कि मेरे मन में बैठा अहंकार ही मेरे मार्ग में बाधा बन गया है। मैंने धीरे-धीरे अपने अन्दर बैठे अभिमान को दूर किया और पुनः अपने मित्रों का सहयोग मुझे मिलने लगा। कहाँ तो मैं समझता था कि मुझे सब कुछ आता है, लेकिन परीक्षा में बहुत कम अंक आने पर मुझे ज्ञात हुआ कि मेरा अभिमान ही मेरे विकास में बाधा डाल रहा था। अब मैं अभिमान से रहित होकर अपने पथ पर तीव्रगति से अग्रसर हो रहा हूँ।

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