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ICSE Hindi 2017 Paper Solved Previous Year for Class 10

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ICSE Hindi 2017 Paper Solved for Class 10

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ICSE Hindi Previous Year Question Paper 2017 Solved for Class 10

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  • Answers to this Paper must be written on the paper provided separately.
  • You will not be allowed to write during the first 15 minutes.
  • This time is to be spent in reading the Question Paper.
  • The time given at the head of this Paper is the time allowed for writing the answers.
  • This paper comprises of two Sections – Section A and Section B.
  • Attempt all questions from Section A.
  • Attempt any four questions from Section B, answering at least one question each from the two books you have studied and any two other questions.
  • The intended marks for questions or parts of questions are given in brackets [ ].

SECTION – A  [40 Marks]

(Attempt all questions from this Section)

Question 1.

Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : [15]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए :
(i) पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं तथा हमारी सच्ची मित्र एवम् गुरु भी होती हैं। हाल ही में पढ़ी गई अपनी किसी पुस्तक के विषय में बताते हुए लिखिए कि वह आपको पसन्द क्यों आई और आपने उससे क्या सीखा?
(ii) ‘पर्यावरण है तो मानव है’ विषय को आधार बनाकर पर्यावरण सुरक्षा को लेकर आप क्या-क्या प्रयास कर रहे हैं ? विस्तार से लिखिए।
(iii) कम्प्यूटर तथा मोबाइल मनोरंजन के साथ-साथ हमारी ज़रूरत का साधन अधिक बन गए हैं। हर क्षेत्र में इनसे मिलने वाले लाभों तथा हानियों का वर्णन करते हुए, अपने विचार लिखिए।
(iv) अरे मित्र ! “तुमने तो सिद्ध कर दिया कि तुम ही मेरे सच्चे मित्र हो” इस पंक्ति से आरम्भ करते हुए कोई कहानी लिखिए।
(v) प्रस्तुत चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर उसका परिचय देते हुए कोई एक कहानी अथवा घटना लिखिए जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए।

Answer :

(i) पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र

दोस्तों, यह सच है कि पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती हैं।पुस्तकों से ही हमें जीवन का सच्चा ज्ञान मिलता है। यह ज्ञान का भंडार होती हैं, इनके द्वारा ही हम जीवन के विभिन्न क्षेत्र तथा विभिन्न विषयों जैसे देश -विदेश का इतिहास, तकनीक, दर्शन आदि का सही तरीके से ज्ञान प्राप्त कर उनका जीवन में उपयोग कर अपने जीवन को सफल बनाते हैं।

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पुस्तकें किसी भी व्यक्ति की भावनाओं या उनके विचारों के प्रचार एवं प्रसार का सशक्त माध्यम है। प्राचीन काल में जबकि छपाई-रंगाई के साधन नहीं थे तब भी हमारे देश में अनेक महान ऋषि -मुनि अपने द्वारा दिए जाने वाले ज्ञान को  ताड़-पत्र पर लिखकर उसे सहेज कर रखते थे जैसे-जैसे मानव सभ्यता का विकास हुआ, तकनीकी युग आरंभ हुआ तब छापाखाना (प्रिंटिंग मशीन) के आविष्कार से विभिन्न पुस्तकों का निर्माण करना आसान हो गया। अधिक संख्या में पुस्तकों के निर्माण से इसकी पहुँच आम जनता तक हो गई ,इससे ज्ञान विज्ञान के एक नए युग का आरंभ हुआ।

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  पुस्तकें हम सभी के जीवन में प्रेरणा देने का कार्य करती हैं, पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त करके ही इंसान पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित करने की क्षमता रखता है। महात्मा गांधी जी को भी श्रीमद्भागवत गीता से ही अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की प्रेरणा मिली। तुलसीदास कृत रामचरितमानस तथा वेद व्यास कृत महाभारत जैसे अमूल्य निधि ने संपूर्ण युग को तथा भावी पीढ़ी को प्रेरित एवं प्रभावित किया। इन विभिन्न महान कृतियों ने आदिकाल से अब तक न केवल हमारा सही रूप में मार्गदर्शन किया बल्कि हमारे देश के गौरव पूर्ण इतिहास तथा सांस्कृतिक व साहित्यिक विरासत को संभाल कर रखा।
   पुस्तके हमारी सच्ची मित्र होती हैं जो हमें ज्ञान रुपी वह अनमोल मोती देती हैं जिन्हें पिरोकर हम अपने जीवन को सही आयाम दे पाते हैं। यदि हम बुरे मित्रों से संगति रखते हैं तो हममे भी कुसंस्कार ही विकसित होगा जबकि अच्छे मित्र न होने पर भी यदि हम पुस्तकों के साथ आनंद प्राप्त करना सीख जाएँ तो हमें एकांत में होने का भय भी महसूस नहीं होगा, यह हमें सही अर्थों में साहस एवं धैर्य सिखाती है। आज भी कई लोग अपने साथ हनुमान चालीसा की छोटी किताब रखते हैं तथा डर लगने पर इसका पाठ करते हैं।
पुस्तकें ही सही रूप में चरित्र निर्माण करने में सहायक होती हैं। हमारे विभिन्न धर्म ग्रंथ रामायण, गीता, कुरान, गुरु ग्रंथ साहिब, बाईबल आदि जहां हमें धर्म एवं कर्म की सही राह दिखाते हैं। वही पंचतंत्र की कहानियां, हितोपदेश आदि हमें नैतिकता का सही रूप से पाठ पढ़ाते हैं। आज के समय में भी अनेक मोटिवेशनल स्पीकर अपनी पुस्तकों के द्वारा नकारात्मक भाव को स्वयं से दूर करने एवं सफलता प्राप्त करने की विभिन्न तैयारियों के बारे में उत्कृष्ट ज्ञान देते रहते हैं।
   वर्तमान समय में युवा वर्ग समसामयिक ज्ञान एवं उत्तम विचारों से युक्त पुस्तकों को पढ़कर अपने चरित्र का विकास सही दिशा में कर सकते हैं, समाज को आगे बढ़ाने में तथा देश की एकता व अखंडता को मजबूत करने में अपना योगदान दे सकते हैं। यह जरूरी है कि घटिया पुस्तकों के अध्ययन से स्वयं को बचा कर रखें, यह ना केवल मानसिकता को विकृत करती है बल्कि नैतिकता व चरित्र के पतन में भी सहायक सिद्ध होती है।
 अतः सही पुस्तकों का चयन करके, उसके ज्ञान को अपने जीवन में उतार कर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

(ii) मानव और प्रकृति का संबंध अत्यंत प्राचीन है। प्रकृति ने मानव को अनेक साधन दिए, जिनसे उसका जीवन सुखद बना रहे, लेकिन मानव ने प्रकृति का शोषण करना आरंभ कर दिया तथा प्रकृति को अपनी ‘चेरी’ समझने की भूल करने लगा। वैज्ञानिक प्रगति’ को आधार बनाकर मनुष्य ने अपने पर्यावरण को ही प्रदूषित करना आरंभ कर दिया। वह यह भूल गया कि पर्यावरण है तो जीवन है। सृष्टि के आरंभ में प्रकृति में एक संतुलन बना हुआ था।

धीरे-धीरे बढ़ती जनसंख्या, नगरों की वृद्धि, वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं औद्योगिक विकास के कारण प्रदूषण जैसी घातक समस्या का जन्म हुआ। आजकल वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण एवं भूमि प्रदूषण के कारण स्थिति इस हद तक बिगड़ गई है कि अनेक घातक एवं असाध्य रोगों का जन्म हो रहा है तथा वातावरण अत्यंत विषाक्त हो गया है। प्रदूषण एक विश्व व्यापी समस्या है जिसका समाधान करना कठिन है, फिर भी इसकी रोकथाम के लिए समूचे विश्व में प्रयास किए जा रहे हैं; जैसे औद्योगिक इकाइयों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर स्थापित करना, वाहनों में पेट्रोल तथा डीजल के स्थान पर ऐसी गैसों का प्रयोग करना जो प्रदूषण मुक्त हों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए ‘ट्रीटमेंट प्लांट’ लगाने तथा अपशिष्ट पदार्थों को किसी नदी में प्रवाहित न करने की बाध्यता तथा झुग्गी झोंपड़ियों को घनी आबादी से दूर बसाया जाना।

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