ISC Hindi 2013 Class-12 Previous Year Question Papers

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ISC Hindi 2013 Class-12 Previous Year Question Papers Solved


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Sections-A


Previous Year Question Papers Solved for ISC Hindi 2013 Class-12 

Section-A-Language (50 Marks)

प्रश्न 1.
Write a composition in Hindi in approximately 400 words on any ONE of the topics given below :- [20]

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 400 शब्दों में हिन्दी में निबन्ध लिखिये :
(a) विज्ञान की चमत्कारिक देन ‘कम्प्यूटर’ आज के युग में अति आवश्यक है। इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करें।
(b) समाज सेवा सच्ची मानव सेवा।
(c) शिक्षा का व्यवसायीकरण ही शिक्षा के स्तर में गिरावट का कारण है पक्ष या विपक्ष में अपने विचार लिखिए।
(d) किसी पर्वतीय स्थल की यात्रा का वर्णन कीजिए जो आपके जीवन की अविस्मरणीय यात्रा बन गई हो।
(e) “जिसने अनुशासन में रहना सीख लिया उसने जीवन का सबसे बड़ा खजाना पा लिया।” विवेचन कीजिए।
(f) निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर मौलिक कहानी लिखिए.
(i) अस्पताल में बहुत भीड़ देखकर मन परेशान हो गया।
(ii) एक कहानी जिसका अन्तिम वाक्य होगा “इसलिए कहते हैं नैतिक पतन से देश का पतन होता है।”
उत्तर- 1     (ISC Hindi 2013 Class-12)
(a)

“विज्ञान की चमत्कारिक देन ‘कम्प्यूटर’
आज के युग की आवश्यकता”

आज के युग को विज्ञान के चमत्कारों का युग कहा जाता है। यह सच भी है कि सुबह से लेकर रात तक हम लोग जितनी भी वस्तुएँ प्रयोग में लाते हैं प्रायः वे सभी विज्ञान की ही देन हैं। मानव आदिकाल से ही अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय हमें नित नवीन आविष्कारों को जन्म देकर देता रहा है। इस दिशा में विज्ञान व वैज्ञानिकों ने मानव जीवन में एक अद्भुत क्रान्ति ला दी है। विज्ञान की ही एक नई चमत्कारिक देन है कम्प्यूटर।।

कम्प्यूटर का प्रयोग गत दस-बारह वर्षों से अत्यधिक तीव्रता से बढ़ता जा रहा है। जनसामान्य के हितार्थ एवं तीव्र आर्थिक समृद्धि के लिए कम्प्यूटर का अधिकाधिक प्रयोग आवश्यक है। वास्तव में जिस कम्प्यूटर का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में दस-बारह वर्ष पूर्व किया गया था वही आज कम्प्यूटर शिक्षा का एक आवश्यक अंग बन गया आज कम्प्यूटर के कारण उद्योग, शिक्षा, प्रशासन, कृषि विज्ञान एवं तकनीकी आदि सभी क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। हमारे प्रधानमन्त्री मोदी जी का प्रत्येक कार्य कम्प्यूटर द्वारा कराने का सपना आज साकार दिखाई दे रहा है।

कम्प्यूटर का आविष्कार एवं भूमिका- कम्प्यूटर के जनक अंग्रेज गणितज्ञ चार्ल्स बेबेज को स्वीकारा जाता है। उन्होंने ही गणित व खगोल विज्ञान सम्बन्धी सूक्ष्म सारणी तैयार करने हेतु एक महान गणक यन्त्र की योजना बनायी, किन्तु इसके असफल हो जाने पर अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. बेन्नेवर बुश ने 1930 में यान्त्रिक कल-पुर्जी का एक यन्त्र बनाया, जिसने ही औद्योगिक कम्प्यूटर को जन्म दिया। वही आधुनिक इलैक्ट्रोनिक कम्प्यूटर के जनक कहे जाते हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के समय पहली बार विद्युतचालित कम्प्यूटर का निर्माण गणना करने के लिए हुआ था। वर्तमान में छोटे-बड़े सभी उद्योगों, तकनीकी व्यवसायों, प्रशासनिक कार्यालयों, वैज्ञानिक संस्थाओं में कम्प्यूटर का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। इसने अपनी उपयोगिता ही नहीं दर्शायी है बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रान्ति उत्पन्न कर दी है।

कम्प्यूटर के क्षेत्र- आज कम्प्यूटर का क्षेत्र न केवल अत्यन्त व्यापक हो गया है बल्कि इसने अक्षर, शब्द, आकृति व तार्किक कथनों को भी ग्रहण कर विभिन्न व्यवसायों के लिए एक सरल व्यवहार प्रणाली की रचना की है।

कम्प्यूटर वर्तमान में सूचना प्रसारण एवं नियन्त्रण का शक्तिशाली साधन बन गया है। इससे उपग्रहों के अन्तरिक्ष में संचरण, उनका सम्पर्क व नियंत्रण, बड़े-बड़े उद्योगों में मशीनों के संचालन आदि के जटिल कार्यों को आसान बना दिया है।

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कम्प्यूटर द्वारा बैंकों के कार्य-व्यवहार, हिसाब-किताब सरल बन सके हैं। यह न केवल गणना के लिए उपयोगी है अपितु भवनों, कारों, मोटरों, रेलों, वायुयानों तक के प्रारूप तैयार करने में सार्थक एवं समर्थ है। वास्तव में इसने हमारी हर मुश्किल आसान बना दी है। इससे विकास की गति कई गुना बढ़ गई है। यह मनुष्य के मस्तिष्क से भी द्रुत गति से कार्य करता है। आज हमें कूँची लेकर बैठने व कैनवास पर चित्र उकेरने की आवश्यकता नहीं क्योंकि कम्प्यूटर हमें एक नियोजित प्रोग्राम के अनुसार प्रिंट की कुंजी दबाते ही प्रिंटर द्वारा कागज पर चित्र छाप कर दे देता है।

अनुसंधान के क्षेत्र में इससे बड़ा क्रान्तिकारी परिवर्तन नहीं आया है। बच्चों के मनोरंजन और खेलों के कारण यह उनके आकर्षण का केन्द्र है। चिकित्सा के क्षेत्र में यह मानव हितार्थ कार्यों में संलग्न है। रेलवे स्टेशन, होटल, मॉल, बाजार सभी स्थानों पर कम्प्यूटर अपनी पहचान बना चुका है। सामान्य ज्ञान का यह भण्डार है। परीक्षा-परिणामों की गणना, योग, गुणा, भाग, समाचार पत्र, पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन आदि सभी कार्य आज कम्प्यूटर पर आश्रित हो गए हैं। इससे पल-भर में हमारे सभी कार्य पूर्ण हो जाते अतः समय की माँग व हमारी आवश्यकताओं ने हमें पूर्णत: कम्प्यूटर पर निर्भर बना दिया है। कम्प्यूटर का अधिक से अधिक प्रयोग करके हम अपने देश की प्रगति में वृद्धि कर सकते हैं। विज्ञान की चमत्कारिक देन ‘कम्प्यूटर’ आज के युग में अति आवश्यक है।

(b)

समाज सेवा–सच्ची मानव सेवा।   (ISC Hindi 2013 Class-12)

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में वह एक-दूसरे के साथ हिल-मिल कर रहता है तथा एक-दूसरे के सुख-दु:ख में । सहयोगी बनता है। मानव-समाज के सुसंचालन के लिए मानव-हृदय में मानव के प्रति सेवा भावना का होना अति आवश्यक है।

समाज सेवा की भावना ही सच्ची मानव सेवा स्वीकारी गई है। वास्तव में मानवता को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। कवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है-‘वही मनुष्य है, जो मनुष्य के लिए मरे।’ यह प्रकृति का भी सहज स्वाभाविक नियम है। प्रकृति के सभी अंग किसी-न-किसी रूप में दूसरों की भलाई में तत्पर रहते हैं फिर मनुष्य क्यों नहीं? यदि मनुष्य अपने ही स्वार्थ की चिन्ता करे तो वह पशु की श्रेणी में आ जाता है, स्वार्थी कहलाता है।

सामाजिक प्राणी होने के नाते, दूसरों के सुख-दुःख की चिन्ता करना, उनका हित सोचना, सहयोग देना मानव का परम कर्तव्य एवं समाज सेवा होती है। मानव सेवा के पथ पर चलने हेतु हमें स्वीकारना होगा कि हमारा शरीर परोपकार के लिए है। परोपकार के भावों से ही सच्ची मानव सेवा एवं मानवता के आदर्श को पाया जा सकता है।

वास्तव में जब प्रकृति के जीव-जन्तु निःस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई में तत्पर रहते हैं तब विवेकशील प्राणी होते हुए भी मनुष्य यदि मानव जाति की सेवा न कर सका तो उसका जीवन कलंक स्वरूप ही है। मनुष्य होते हुए भी मनुष्य कहलाने का उसे कोई अधिकार नहीं। जिसमें समस्त मानव समुदाय के लिए सहानुभूति व प्रेम का भाव रहता है। वही सच्ची समाज सेवा, मानव सेवा के रूप में अपना सकता है।

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