ISC Hindi 2016 Class-12 Previous Year Question Papers

तुलसीदास जी ने अभिमान को पाप का मूल बताया है–

“दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छोड़िये, जब लगि घट में प्रान।”

(e)

‘योग स्वस्थ जीवन का आधार है’      (ISC Hindi 2016 Class-12)

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योग भारत की प्राचीन संस्कृति का गौरवमयी हिस्सा है जिसकी वजह से भारत सदियों तक विश्व गुरु रहा है। योग एक ऐसी सुलभ एवं प्राकृतिक पद्धति है जिससे स्वस्थ मन एवं शरीर के साथ अनेक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं। योग को स्वामी रामदेव ने गुफाओं और कन्दराओं से निकालकर आम जन तक पहुँचाया है। भारतीय धर्म और दर्शन में योग का आध्यात्मिक महत्व है। आध्यात्मिक उन्नति या शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की आवश्यकता व महत्व को प्रायः सभी दर्शनों एवं धार्मिक सम्प्रदायों ने एकमत व मुक्तकंठ से स्वीकार किया है। आधुनिक युग में योग का महत्व बढ़ गया है। स्वास्थ्य रक्षा के लिए योग रामबाण दवा है। इसके सहारे मनुष्य स्वस्थ तो रहता ही है साथ ही साथ कई बीमारियों से छुटकारा भी पाता है।

योग भारत और नेपाल में एक आध्यात्मिक प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। यह शब्द, प्रक्रिया और धारणा बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू धर्म में ध्यान प्रक्रिया से सम्बन्धित है। ‘योग’ शब्द भारत से बौद्ध धर्म के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण-पूर्व एशिया और श्रीलंका में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत में लोग इससे परिचित हैं। प्राचीन जीवन पद्धति लिए योग आज के परिवेश में हमारे जीवन को स्वस्थ और खुशहाल बना सकता है। आज के प्रदूषित वातावरण में योग एक ऐसी औषधि है जिसका कोई साइड इफैक्ट नहीं है, बल्कि योग के अनेक आसन जैसे शवासन हाई ब्लडप्रैशर को सामान्य करता है, जीवन के लिए संजीवनी है अनुलोम-विलोम कपालभाति प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम मन को शान्त करता है। वक्रासन हमें अनेक बीमारियों से बचाता है।

आज कम्प्यूटर की दुनिया में दिनभर उसके सामने बैठे-बैठे काम करने से अनेक लोगों को कमर दर्द एवं गर्दन दर्द होना एक आम बात हो गई है, ऐसे में शलभासन तथा ताड़ासन हमें दर्द से छुटकारा दिलाते हैं। पवन मुक्तासन अपने नाम के अनुरूप पेट से गैस की समस्या को दूर करता है। गठिया की समस्या को मेरुदंडासन दूर करता है। योग में ऐसे अनेक आसन हैं जिनको जीवन में अपनाने से कई बीमारियाँ समाप्त हो जाती हैं और खतरनाक बीमारियों का असर भी कम हो जाता है। 24 घण्टे में से महज कुछ मिनट का ही प्रयोग यदि योग में उपयोग करते हैं तो अपनी सेहत को हम चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं। फिट रहने के साथ योग हमें सकारात्मक ऊर्जा भी देता है। योग से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।

यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि योग हमारे लिए हर तरह से आवश्यक है। यह हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। योग के माध्यम से आत्मिक सन्तुष्टि, शान्ति और ऊर्जावान चेतना की अनुभूति प्राप्त होती है जिससे हमारा जीवन तनावमुक्त तथा हर दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है। हमारे देश की ऋषि परम्परा से प्राप्त योग को आज विश्व भी अपना रहा है। गीता में योग के बारे में लिखा है, “योग स्वयं की स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुँचने की यात्रा है।”

योगासनों से कुछ निम्नलिखित लाभ हैं–

  1. योग का प्रयोग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के लिए हमेशा से होता रहा है। आज की चिकित्सा शोधों ने ये साबित कर दिया है कि योग शारीरिक और मानसिक रूप से मानव जाति के लिए वरदान है।
  2. जहाँ ‘जिम’ आदि से शरीर के किसी खास अंग का ही व्यायाम होता है, वहीं योग से शरीर के समस्त अंग-प्रत्यंगों, ग्रन्थियों का व्यायाम होता है जिससे अंग-प्रत्यंग सुचारु रूप से काम करने लगते हैं।
  3. योगाभ्यास से रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। बुढ़ापे में भी स्वस्थ बने रह सकते हैं। त्वचा पर चमक आती है, शरीर स्वस्थ, निरोग और बलवान बनता है।
  4. जहाँ एक तरफ योगासन माँसपेशियों को पुष्ट करता है जिससे दुबला-पतला व्यक्ति भी ताकतवर और बलवान बन जाता है वहीं दूसरी ओर योग के नित्य अभ्यास से शरीर से फैट भी कम हो जाता है इस तरह योग कृश और स्थूल दोनों के लिए लाभदायक है।
  5. योगासन के नित्य अभ्यास से माँसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता है जिससे तनाव दूर होकर अच्छी नींद आती है, भूख अच्छी लगती है, पाचन सही रहता है।

योग आज एक थैरेपी के रूप में भी उपयोगी सिद्ध हो चुका है। हर एक रोग के लिए विशेष आसन है। रोग विशेष के उपचार के लिए विशेष आसन है। कई ऐसे रोग जिसके उपचार से डॉक्टर जवाब दे देता है उसके लिए भी योग लाभदायक हो सकता है। आसन करना किसी दक्ष व्यक्ति से ही सीखना चाहिए। रोगों से लड़ने के लिए हमारे शरीर में भी प्रतिरोधात्मक शक्ति होती है तथा इस शक्ति को योगासन द्वारा बढ़ाया जा सकता है।

(f)

(i)

इस घटना ने मेरा हृदय परिवर्तन कर दिया    (ISC Hindi 2016 Class-12)

भारतीय इतिहास में अनेक ऐसे प्रसंग मिलते हैं जिनमें किसी घटना से प्रभावित होकर व्यक्ति का हृदय परिवर्तन हो गया। हृदय परिवर्तन किसी सद्मार्ग पर चलने के लिए हुआ हो या अपने को परोपकार में लगाने के लिए हुआ हो या फिर दान आदि के द्वारा धार्मिक प्रोत्साहन के लिए हुआ। मनुष्य का हृदय अत्यन्त कोमल, दयापूर्ण, प्रेम से भरा और मनोबल से परिपूर्ण होता है।

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मनुष्य के मनोभावों के साथ ही हृदय की क्रिया रहती है। मनुष्य का कोई दृढ़ संकल्प उसके हृदय को परिवर्तित कर देता है। महर्षि वाल्मीकि अपनी युवावस्था में डाकू रत्नाकर के नाम से जाने जाते थे। एक बार ऋषियों ने अपने उपदेश से उनका हृदय परिवर्तन कर दिया और अपने कल्याण के लिए ‘राम-राम’ जपने का उपदेश दिया। वे ‘रामराम’ का उल्टा ‘मरा-मरा’ जपने लगे और आगे चल कर महर्षि वाल्मीकि हुए जिन्होंने संस्कृत में वाल्मीकि रामायण लिखी। इनके बारे में एक चौपाई इस प्रकार हैं

“उल्टा नाम जपा जग जाना। वाल्मीकि भये ब्रह्म समाना।”

दूसरा उदाहरण है सम्राट अशोक का जिन्होंने ‘कलिंग’ देश के युद्ध में भीषण नरसंहार के बाद बौद्ध भिक्षु के उपदेश से अपना हृदय परिवर्तन कर लिया और आगे युद्ध न करने की प्रतिज्ञा की। उन्होंने अपनी तलवार रख दी और फिर कभी उसे नहीं उठाया। यह भी मानवता के कल्याण में किया गया ‘हृदय परिवर्तन’ था।

एक दिन छमाही परीक्षा के बाद मैंने बाजार में घूमने का निश्चय किया और अपनी साइकिल उठाकर बाजार की तरफ चल दिया।

तभी मुझे याद आया कि पिताजी की कुछ दवा लेनी थी। इमरजैन्सी के पास एक मेडीकल की बड़ी दुकान है। मैं वहाँ जाकर खड़ा हुआ तो देखा कि गाँव का एक वृद्ध व्यक्ति डॉक्टर का पर्चा लेकर दुकान पर आया और बताया कि उसके बेटे का ऑपरेशन हो रहा है इसलिए उसे शीघ्र इन दवाइयों की आवश्यकता है।

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