ISC Hindi 2015 Class-12 Previous Year Question Papers

ISC Hindi 2015 Class-12 Previous Year Question Papers Solved for practice. Step by step Solutions with Questions. By the practice of Hindi 2015 Class-12 Solved Previous Year Question Paper you can get the idea of solving.

Try Also other year except ISC Hindi 2015 Class-12 Solved Question Paper of Previous  Year for more practice. Because only ISC Hindi 2015 Class-12 is not enough for complete preparation of next council exam. Visit official website CISCE for detail information about ISC Class-12 Hindi.

ISC Hindi 2015 Class-12 Previous Year Question Papers Solved


-: Select Your Topics :-

Advertisement

Sections-A


Previous Year Question Papers Solved for ISC Hindi 2015 Class-12 

Section-A-Language (50 Marks)

प्रश्न 1.
Write a composition in Hindi in approximately 400 words on any ONE of the topics given below :- [20] निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 400 शब्दों में हिन्दी में निबन्ध लिखिये-
(a) नारी : माँ, बहन, पत्नी तथा बेटी हर रूप में आदरणीय है। विवेचन कीजिए।
(b) जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए हर व्यक्ति अपने लिए किसी व्यवसाय को चुनना चाहता है। आप अपने लिए किस व्यवसाय को चुनना पसन्द करेंगे। उसकी प्राप्ति के लिए आप क्या-क्या प्रयत्न करेंगे तथा उससे देश व समाज को क्या लाभ होगा।
(c) “मानव की अतिमहत्वाकांक्षा ने ही प्रदूषण जैसी विकराल समस्या को जन्म दिया है।” इस कथन के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार प्रकट करें।
(d) आज के युग में टूटते परिवार।
(e) किसी ऐसे चलचित्र का वर्णन कीजिए जिसे आपने अपने परिवार के साथ देखा। उस चलचित्र के निर्देशन, संगीत निर्देशन, कहानी तथा कहानी से मिलने वाली शिक्षा का वर्णन करते हुए बताएं कि वह चलचित्र आपको किस कारण से बहुत अच्छा लगा।
(f) निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर मौलिक कहानी लिखिए

(i) कहानी का अन्तिम वाक्य होगा ……………………….
………………………. “पिताजी के मार्गदर्शन से ही आज मैं
इस योग्य बना हूँ।”

(ii) कहानी की शुरुआत नीचे लिखे वाक्य से कीजिए :
“एक दिन मेरा पड़ोसी” ……………………….
उत्तर- 1     (ISC Hindi 2015 Class-12)
(a)

नारी : माँ, बहन, पत्नी तथा बेटी के रूप में   (ISC Hindi 2015 Class-12)

सृष्टि के आदिकाल से ही नारी की महत्ता अक्षुण्ण है। नारी सृजन की पूर्णता है। उसके अभाव में मानवता के विकास की कल्पना असम्भव है। समाज के रचना विधान में नारी के निम्न रूप हैं माँ, प्रेयसी, पत्नी, बहन तथा पुत्री। हम अपने जीवन में नारी के इन विभिन्न रूपों से किसी न किसी तरह सम्बन्ध रखते हैं तथा यह रूप हमारे जीवन को किसी न किसी रूप में प्रभावित भी करते हैं।

जब बालक जन्म लेता है तो नारी का ममतामयी माँ का रूप उसका पालन-पोषण करता है। यह नारी का सबसे प्रभावशाली रूप है। माँ को बच्चे की प्रथम शिक्षिका के रूप में जाना जाता है क्योंकि बच्चा सर्वप्रथम संस्कार, विचार या शिक्षा माँ से ही ग्रहण करता है। माँ द्वारा दिये गये संस्कार पर ही यह निर्भर करता है कि उसका भविष्य में कैसा आचरण रहेगा।

नारी का एक और महत्वपूर्ण रूप है— बहन। हमारे सर्वप्रथम मित्र के रूप में हम अपने बहन-भाई को देखते हैं। बाहरी संसार में हमारे मित्र विद्यालय में प्रवेश के बाद बनते हैं, परन्तु बहन एक व्यक्ति की जीवन की सर्वप्रथम मित्र होती है, जो आपकी छोटी-छोटी गलतियों पर सीख देती है, उन गलतियों को माता-पिता से छिपाती है तथा आपको हमेशा गलत राह पर जाने से रोकती है। माँ की तरह आपको डाँटती भी है और एक मित्र की तरह आपकी समस्याओं का समाधान भी करती है। इसलिए हमें कभी भी नारी का अपमान नहीं करना चाहिए तथा हमेशा उसे सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए। नारी का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण रूप को गृहलक्ष्मी, गृहदेवी या गृहणी के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

नारी पत्नी के रूप में भी उतनी ही आदरणीय है जितनी की माँ और बहन के रूप में, पत्नी को जीवनसंगिनी भी कहते हैं अर्थात् जीवन भर साथ देने वाली नारी। एक पत्नी अपने कर्तव्य को पूर्ण करते हुए अपने पति का ही नहीं अपितु पूरे परिवार की सुख-सुविधा तथा उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखती है, मित्र की तरह आपके हर सुख-दुःख में साथ देती है तथा जीवन के हर मोड़ पर हर परेशानी में आपके साथ खड़ी रहती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि नारी संसार की उत्पत्ति एवं भरण-पोषण का मुख्य कार्य करती है। पुरुष का साथ वह कभी मातृशक्ति बनकर देती है तो कभी बहन, कभी प्रेयसी के रूप में सहायता करती है, तो कभी पत्नी बनकर। हर परिस्थिति में, हर रूप में वह पुरुष का साथ देती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि नारी का प्रत्येक रूप आदरणीय तथा सम्माननीय है।

Advertisement

(b)

जीवन में सुख-समृद्धि के लिए
किसी व्यवसाय का चुनाव

जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए हर व्यक्ति अपने लिए किसी व्यवसाय को चुनना चाहता है। मैं अपने जीवन में एक सुयोग्य शिक्षक बनकर देश की प्रगति में योगदान दूंगा। मनुष्य विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है, क्योंकि वह मनन, चिन्तन तथा विचारपूर्वक ही कोई कार्य करता है। शिक्षा का क्षेत्र बड़ा व्यापक है। इसमें कार्य करके परोपकार और देश के विकास में सहयोग होगा। मैं एक आदर्श शिक्षक बनूँगा और हर प्रकार से छात्रों की सहायता कर उन्हें शिक्षित करूँगा। जिन देशों की अधिकतर जनसंख्या शिक्षित है, वे निरन्तर उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं।

मनुष्य एक बौद्धिक प्राणी है। जिसके हृदय में दृढ़ संकल्प, अदम्य साहस और एक निश्चित उद्देश्य हो वह भावी योजनाओं का चिन्तन-मनन करके अपने ध्येय की ओर उन्मुख होता है, वही अपनी मंजिल पाने में सफल होता है। मैं आज एक विद्यार्थी हूँ पर भविष्य में मुझे क्या बनना है? इसके लिए मेरे मन में कई कल्पनायें हैं।

शिक्षण काल से ही मेरी रुचि पढ़ने-पढ़ाने में रही। मेरे गुरुजी ने एक बार मुझसे कहा कि मुझमें एक आदर्श अध्यापक बनने के गुण हैं। उसी दिन से मैंने अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर लिया। इसके लिए मुझे आदर्श विद्यार्थी बनना होगा, तपस्वी के समान तपस्या, सैनिक के समान अनुशासन और पृथ्वी के समान सहनशीलता को अपनाना होगा। तभी आदर्श अध्यापक बन सकता कुछ अध्यापक तो केवल जीविकोपार्जन के लिए ही अध्यापक बने हैं, लेकिन अध्यापक गुरुत्ता और महिमा की प्रतिमा, विद्या का प्रकाशस्तम्भ हैं। उनका पुनीत कर्तव्य शिष्यों के अन्धकार को दूर करना है क्योंकि विद्या ही सर्वोच्च धन है। विद्या दान सबसे बड़ा दान है। गुरु के कर्तव्य के अनुसार उनमें चारित्रिक और नैतिक भावनाओं को भी जगाऊँगा। मैं उनके सामने त्याग, प्रेम, परोपकार और सेवा का आदर्श स्थापित करूँगा। मैं किसी दुर्व्यसन का शिकार नहीं बनूँगा। मेरा रहन-सहन अत्यन्त सरल तथा स्वच्छ रहेगा। इस पुनीत कार्य से मुझे जीवन भर सन्तोष और शान्ति मिलती रहेगी। मैं कबीर के कथनानुसार ऐसा ‘गुरु’ बनूँगा जो शिष्य को बाह्य रूप से ताड़ना देता हुआ भी हार्दिक भावना से उसका मंगल करे।

“गुरु कुम्हार शिष कुम्भ है, गढ़ि गढ़ि काढ़े खोट।
अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥”

Read Next 👇 Click on Page Number Given Below 👇

Leave a comment