Jako Rakhe Saiya Mar Sake Na Koy जाको राखों साइयाँ मार सके न कोई

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Jako Rakhe Saiya Mar Sake Na Koy जाको राखों साइयाँ मार सके न कोई एक मौलिक कहानी( A Moral Story )। इस मुहावरे जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय का यह अर्थ होता है कि जिसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं उनका कुछ भी अहित नहीं हो सकता है।यह नीचे की दी हुई मौलिक कहानी से स्पष्ट होता है। ICSE specimen question paper 2023 Hindi Question number-1 solutions as latest CISCE guideline. View Hindi question paper here and solutions.

जाको राखे साइयाँ : एक मौलिक कहानी Jako Rakhe Saiya A Moral Story 

बहुत समय पहले की बात है । किसी गांव में एक किसान रहता था। उसके पास बहुत ढ़ेर सारे जानवर थे। उन्ही जानवरों में से एक गधा भी उसके पास था। एक दिन की बात है वह गधा चरते-चरते एक खेत में पहुंचा और वह उस खेत में चरने लगा । उस खेत में ही एक पुराना कुआँ था जिसको वह गधा न देख पाया और चरते हुए उसमें फिसल कर गिर गया । जैसे ही वह गधा उस कुए में गिरा वह जोर-जोर से ढ़ेचू-ढेचू करके चिल्लाने लगा । उसकी आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे और आस पास के कई किसान वहां पर इकट्ठा हो गए।

कुछ समय में ही गधें के मालिक को यह बात पता चली तो वो भी वहां आ गया । किसान ने स्थिति को परखा । उसे उस गधे पर दया आई लेकिन उसने मन में सोचा कि इस बूढ़े गधे को बचाने से कोई लाभ नहीं। और इसमें मेहनत भी बहुत लगेगी। साथ ही कुए की भी कोई जरूरत नहीं है। उसने बाकी लोगों से कहा कि मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी तरह इस गधे को बचा सकते है।तो आप सभी अपने अपने काम पर लग जाइए। यहां समय मत गंवाइये।

ऐसा कह कर वह आगे बढने लगा तो एक मजदूर ने बोला कि मालिक इस गधे ने कई वर्षों तक आपकी सेवा की है इसे ऐसे मरने के लिए छोड़ कर मत जाइये। ऐसे छोड़कर जाने से अच्छा होगा कि हम इसे इसी कुए में दफना दे। किसान सहमत हो गया और बोला कि आओँ मिलकर इस कुए में मिट्टि डालते है।

गधा यह सब सुन रहा था। अब वह डर गया गधे को लगा कि उसका मालिक उसे नहीं बचाना चाहता है। परन्तु उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान को याद कर वहां से निकलने की सोचने लगा । सब लोगों ने मिलकर उस पर मिट्टि डालना शुरू किया । गधें ने सोचा कि कुछ भी हो जाये वह हार नहीं मानेगा। वह पूरी ताकत से उछाल मारने लगा । किसान ने भी सभी लोगों की तरह एक बोरी मिट्टी उस कुए में डाल दी और देखने लगा। जैसे ही मिट्टी गधे के ऊपर पड़ती वह उसे नीचे गिरा देता और उस मिट्टी के ऊपर आ जाता । किसान को भी ये बात समझ आ गई तो वह भी मिट्टी डालने लगा देखते देखते ही कुए के मुहाने पर पहुँच गया और अंत में गधा कूद कर बाहर आ गया । इससे हमकों यहीं सीखने को मिलता है कि अगर तुम्हें ईश्वर ने बचाने का ठाना है तो कोई तु्म्हे नहीं मार सकता है। इसी का मतलब है कि जाकों राखे साइयां मार सके न कोए।

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