ICSE Hindi 2019 Paper Solved Previous Year for Class 10

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ICSE Hindi 2019 Paper Solved for Class 10

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ICSE Hindi Previous Year Question Paper 2019 Solved for Class 10

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  • Answers to this Paper must be written on the paper provided separately.
  • You will not be allowed to write during the first 15 minutes.
  • This time is to be spent in reading the Question Paper.
  • The time given at the head of this Paper is the time allowed for writing the answers.
  • This paper comprises of two Sections – Section A and Section B.
  • Attempt all questions from Section A.
  • Attempt any four questions from Section B, answering at least one question each from the two books you have studied and any two other questions.
  • The intended marks for questions or parts of questions are given in brackets [ ].

SECTION – A  [40 Marks]

(Attempt all questions from this Section)

Question 1.

Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : [15]

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिंदी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए :
(i) आपके विदयालय में एक मेले का आयोजन किया गया था। यह किस अवसर पर, किस उद्देश्य से किया गया था ? उसके लिए आपने क्या-क्या तैयारियाँ की ? आपने और आपके मित्रों ने एवम शिक्षकों ने उसमें क्या सहयोग दिया था ? इन बिंदुओं को आधार बनाकर एक प्रस्ताव विस्तार से लिखिए।
(ii) यात्रा एक उत्तम रुचि है। यात्रा करने से ज्ञान तो बढ़ता ही है, स्थान विशेष की संस्कृति तथा परंपराओं का परिचय भी मिलता है। अपनी किसी यात्रा के अनुभव तथा रोमांच का वर्णन करते हुए एक प्रस्ताव लिखिए।
(iii) ‘वन है तो भविष्य है’ आज हम उसी भविष्य को नष्ट कर रहे हैं, कैसे ? कथन को स्पष्ट करते हुए जीवन में वनों के महत्त्व पर अपने विचार लिखिए।
(iv) एक मौलिक कहानी लिखिए जिसका अंत प्रस्तुत वाक्य से किया गया हो-और मैंने राहत की साँस लेते हुए सोचा कि आज मेरा मानव जीवन सफल हो गया।
(v) नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर उसका परिचय देते हुए कोई लेख, घटना अथवा कहानी लिखिए, जिसका सीधा व स्पष्ट संबंध, चित्र से होना चाहिए।

Answer

(i)  विद्यालय में मेले का आयोजन

इस महीने की 7 तारीख को हमारे स्कूल सभागार में एक विज्ञान मेला आयोजित किया गया था। इसका उद्घाटन जिला शिक्षा अधिकारी ने किया था। प्रदर्शन पर 120 से अधिक आइटम थे उनमें से ज्यादातर मॉडल काम कर रहे थे प्रत्येक मॉडल ने कुछ वैज्ञानिक कानून के व्यावहारिक अनुप्रयोग में नवीनता और अभिनव दिखाया है। हर कोई इस प्रदर्शनी को देखने के लिए मोहित हो गया था। छात्रों ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रत्येक मॉडल का तंत्र। दोनों, छात्रों और शिक्षकों ने इस मेले को सफल बनाने के लिए बहुत मेहनत की थी उनके प्रयासों की सभी उपस्थितियों ने सराहना की।

इन दिनों विज्ञान, शाप और वरदान दोनों ही है। एक तरफ, उसने हमें परमाणु बम की तरह बड़े पैमाने पर विनाश के हथियार दिए हैं। दूसरी तरफ, इससे अनगिनत लोगों को आशा मिली है जो बीमार हैं और मर रहे हैं। अंधेरे युगों के दौरान ऐसी स्थिति थी कि लोग क्षय रोग, मलेरिया, ऊष्मा खांसी, खसरा इत्यादि जैसी बीमारियों से मर गए। उनमें से किसी के लिए कोई इलाज नहीं था और न ही वहां सक्षम चिकित्सा सुविधाएं भी थी।

अस्पताल अंधेरे और सुस्त जगह थे हर कोई यह नहीं जानता था कि गंदगी में भी बीमारियां पैदा होती हैं। कई लोग जो अन्यथा बच सकते थे, मर गया क्योंकि परिवहन बहुत धीमा था| इसके परिणामस्वरूप देर से पहुंचने वाले डॉक्टर फिर व्यापक रूप से विश्वास किया गया था कि किसी व्यक्ति की बीमारी किसी भी रोगाणु या संक्रमण के कारण नहीं होती है, बल्कि इसलिए कि कुछ भूत या बुराई उन पर छाया रखती है। जब तक विज्ञान की प्रगति लोगों को सफाई के महत्व का एहसास नहीं हुआ। इसका कारण यह है कि आज हम उज्ज्वल और हर्षित दिखने वाले अस्पताल पाते हैं। इसने सिद्धांतों को गलत साबित कर दिया है कि एक व्यक्ति बुराई या भूत के कारण बीमार हो गया है।

परिवहन के तेजी से तरीकों का आविष्कार, जिसमें डॉक्टर को बुलाया जा सकता है, एक्स-रे, वैक्सीन, और मॉडेम ऑपरेटिव विधियों की खोज, एक इंसान के अस्तित्व की संभावना में सुधार हुआ। पेनिकिलिन, रक्त आधान, उच्च तीव्रता इंजेक्शन और तरल पदार्थ स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक और आयाम जोड़ा। हालांकि, सबसे उल्लेखनीय खोज सर्जरी के क्षेत्र में हैं अब एक सर्जन टूटी हुई हड्डियों को ठीक कर सकता है, फाड़े शरीर के अंगों को उंगलियों, पैर की उंगलियों, हाथों और पैरों की तरह बदल सकता है। एक अंधे व्यक्ति एक नई आंख की मदद से देख सकता है। और गुर्दा की विफलता वाला एक रोगी अब भी गुर्दा प्रत्यारोपण के साथ रहने की उम्मीद कर सकता है। फंककियर के अध्ययन ने भी मनुष्य को स्वच्छता के महत्व का पता लगाया है और अच्छी तरह से कस्बों और उपनिवेशों का पता लगाया है। व्यावहारिक वेंटिलेशन और धूप में पर्याप्त हमारे स्वास्थ्य के साथ अद्भुत काम कर सकते हैं। बड़े और वैज्ञानिक रूप से कटे हुए कचरा निपटान और सीवरेज प्रणालियों को बड़े पैमाने पर रोगों के प्रसार की समस्या कम होनी है।

(ii)  पहली यात्रा

मैं भी इस साल अप्रैल में अपने दोस्तों के साथ वैष्णों देवी की यात्रा पर गई थी। मैं वहाँ अपने परिवार के साथ पहले भी जा चुकी थी और हमनें बहुत ही मजे किए थे। दोस्तों के साथ यात्रा का और परिवार के साथ यात्रा का अलग ही मजा है। हम पाँच दोस्त थे और हमने रेलगाड़ी से यात्रा करने का तय किया था और उस समय रेलों मैं बहुत ही ज्यादा भीड़ थी। हमारी ट्रेन अंबाला से रात के 10 बजे की थी। ट्रेन के आते ही हम सब उसमें सवार हो गए और खाना खाया। हम सभी दोस्तों ने रात को लुडो खेला, अंताक्षरी खेली। जम्मु से ट्रेन के गुजरते वक्त हमनें खिड़किया खोलकर ठंडी हवा का आंनद लिया। हम सुबह 7 बजे कटरा पहुँचे जहाँ के पहाड़ों में माता वैष्णों देवी का मंदिर स्थित है।

हम लोगों ने वहाँ पर पहुँचकर हॉटल में कमरा लेकर विश्राम किया और एक बजे माता के मंदिर के लिए चढाई शुरू की जो कि 14 किलोमीटर की है। लगभग दो किलोमीटर चढ़ने के बाद हम बाण गंगा पहुँचे और वहाँ पर स्नान किया। गंगा का पानी बहुत ही शीतल था। उसके बाद हमने रूककर खाना खाया। वैष्णों देवी की चढ़ाई पर सुरक्षा के बहुत ही अच्छे इंतजाम किए गए है। बुढ़े लोगों की चढाई के लिए खच्चर और पालकी आदि का इंजाम है। बच्चों को और बैगों को उठाने के लिए पिठ्ठू वाले है। उनकी हालत बहुत ही दयनीय होती है वह अपनी आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करते है। हम आस पास देखते हुए हंसते खेलते माता रानी का नाम लेकर चढ़ाई चढ़ते गए। दोपहर में गर्मी होने के कारण हम थोड़ी-थोड़ी दुरी पर नींबू पानी जूस आदि पीते रहे। ऐसे करते करते हम माता के मंदिर पहुँच गए और 6 घंटे लाईन में लगने के बाद माता रानी के दर्शन हुए। उसके बाद हमनें भैरों बाबा की चढ़ाई शुरू की जिसके बिना यात्रा को अधुरा माना जाता है। रात को बहुत ही ज्यादा ठंड हो गई थी। हमनें नीचे उतरना शुरू किया। कमरे पर पहुँच कर हमने आराम किया और वापसी के लिए ट्रेन पकड़ी। तीन दिन की इस यात्रा ने हमें बहुत ही सुखद अनुभव दिया जिसे हम कभी नहीं भूल सकते।

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