ISC Hindi 2019 Class-12 Previous Year Question Papers Solved

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ISC Hindi 2019 Class-12 Previous Year Question Papers Solved


-: Select Your Topics :-

Sections-A

Section-B

Gadya Sankalan

Kavya Manjari

Saara Akash

Ashadh Ka Ek Din


Maximum Marks: 100
Time Allowed: Three Hours

(Candidates are allowed additional 15 minutes for only reading the paper.
They must NOT start writing during this time.) Answer questions 1, 2 and 3 in Section A and four other questions from Section B on at least three of the prescribed textbooks. The intended marks for questions or parts of questions are given in brackets [ ].


Previous Year Question Papers Solved for ISC Hindi 2019 Class-12 

Section-A-Language (50 Marks)

प्रश्न 1. (ISC Hindi 2019 Class-12)
Write a composition in approximately 400 words in Hindi on any ONE of the topics given below : [20] किसी एक विषय पर निबंध लिखिए जो 400 शब्दों से कम न हो :

(i) ‘तकनीकी विकास ने मानव को सुविधाओं का दास बना दिया है’ – इस विषय पर अपने विचार व्यक्त – कीजिए।
(ii) ‘वर्तमान युग में आगे बढ़ने के लिए धन की आवश्यकता है न कि प्रतिभा की’ – इस विषय के पक्ष या विपक्ष – में अपने विचार लिखिए।
(iii) पुस्तक एक सच्ची मित्र, गुरु और मार्गदर्शक का कार्य करके जीवन की धारा को बदल सकती है – ‘मेरी प्रिय पुस्तक’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(iv) ‘निरंतर अभ्यास करने से इच्छित कार्य में सफलता मिलती है।’- इस कथन को अपने जीवन के किसी निजी अनुभव द्वारा विस्तारपूर्वक लिखिए।
(v) ‘सहशिक्षा के माध्यम से बालक-बालिका के मध्य मित्रता और समानता का भाव जागता है।’ – इस विषय पर अपने विचार विस्तारपूर्वक लिखिए।
(vi) निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर मौलिक कहानी लिखिए –

(a) ‘साँच को आँच नहीं’।
(b) एक ऐसी मौलिक कहानी लिखिए जिसका अंतिम वाक्य हो :
……… और इस तरह उन्होंने मुझे माफ कर दिया।
उत्तर-1: (ISC Hindi 2019 Class-12)
(i) आज का युग विज्ञान व प्रौद्योगिकी का युग है। नये-नये आविष्कारों ने हमें इतनी सुविधाएँ प्रदान कर दी हैं कि हम उनके दास बन गए हैं। एक क्षण भी इन सुविधाओं के अभाव में रहना कठिनसा प्रतीत होता है। कंप्यूटर और मोबाइल की सुविधा ने हमें एक तरह से अपंग बना डाला है। हम कोई भी कार्य इन दो उपकरणों से जुड़ी सुविधाओं के अभाव में करने के लिए स्वयं को अक्षमसा अनुभव करते हैं।

कंप्यूटर को यांत्रिक मस्तिष्क भी कहा जाता है। यह अत्यंत तीव्र गति से न्यूनतम समय में अधिकसे-अधिक गणनाएँ कर सकता है तथा वह भी बिल्कुल त्रुटि रहित। आज तो कंप्यूटर को लेपटॉप के रूप में एक छोटे से ब्रीफकेस में बंद कर दिया गया है जिसे जहाँ चाहे वहाँ आसानी से ले जाया जा सकता है।

कंप्यूटर आज के युग की अनिवार्यता बन गया है तथा इसका प्रयोग अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है। बैंकों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों आदि अनेक क्षेत्रों में कंप्यूटरों द्वारा कार्य संपन्न किया जा रहा है। आज के युद्ध तथा हवाई हमले कंप्यूटर के सहारे जीते जाते हैं। मुद्रण के क्षेत्र में भी कंप्यूटर ने क्रांति उत्पन्न कर दी है। पुस्तकों की छपाई का काम कंप्यूटर के प्रयोग से अत्यंत तीव्रगामी तथा सुविधाजनक हो गया है। विज्ञापनों को बनाने में भी कंप्यूटर सहायक हुआ है। आजकल यह शिक्षा का माध्यम भी बन गया है। अनेक विषयों की पढ़ाई में कंप्यूटर की सहायता ली जा सकती है।

कंप्यूटर यद्यपि मानव-मस्तिष्क की तरह कार्य करता है परंतु यह मानव की तरह सोच-विचार नहीं कर सकता केवल दिए गए आदेशों का पालन कर सकता है। निर्देश देने में ज़रा-सी चूक हो जाए तो कंप्यूटर पर जो जानकारी प्राप्त होगी वह सही नहीं होगी।

कंप्यूटर का दुरुपयोग संभव है। इंटरनेट पर अनेक प्रकार की अवांछित सामग्री उपलब्ध होने के कारण वह अपराध प्रवृत्ति चारित्रिक पतन एवं अश्लीलता बढ़ाने में उत्तरदायी हो सकती है। कंप्यूटर के लगातार प्रयोग से आँखों की ज्योति पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसका अधिक प्रयोग समय की बरबादी का कारण भी है। एक कंप्यूटर कई आदमियों की नौकरी ले सकता है। भारत जैसे विकासशील एवं गरीब देश में जहाँ बेरोज़गारों की संख्या बहुत अधिक है, वहाँ कंप्यूटर इसे और बढ़ा सकता है। फिर भी हम इस सुविधा के दास बनते जा रहे हैं।

कंप्यूटर की भाँति मोबाइल फ़ोन भी आज जीवन की अनिवार्यता बन गया है। आज से कुछ वर्ष पूर्व इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि हम किसी से बात करने के लिए किसी का संदेश सुनाने के लिए किसी छोटे से यंत्र को अपने हाथ में लेकर घूमेंगे। इस छोटे से यंत्र का नाम है, मोबाइल फ़ोन। मोबाइल फ़ोन से जहाँ चाहें, जिससे चाहें, देश या विदेश में कुछ ही क्षणों में अपना संदेश दूसरों तक पहुँचाया जा सकता है और उनकी बात सुनी जा सकती है। यही नहीं इस उपकरण से (एस. एम. एस.) संदेश भेजे और प्राप्त किए जा सकते हैं। समाचार, चुटकुले, संगीत तथा तरह-तरह के खेलों का आनंद लिया जा सकता है। किसी भी तरह की विपत्ति में मोबाइल फ़ोन रक्षक बनकर हमारी सहायता करता है।

आजकल बैंकिंग, बिल भुगतान, आरक्षण, आवेदन, मौसम संबंधी ज्ञान व पूर्वानुमान आदि के प्रसंग में भी मोबाइल उपयोगी है। सोशल मीडिया के बिना आज का जीवन बोझिल सा लगता है। कुल मिलाकर इन सुविधाओं ने हमें अपना दास बना डाला है।

(ii) वर्तमान युग में आगे बढ़ने के लिए धन की आवश्यकता है न कि प्रतिभा की सृष्टि के समस्त ‘चराचरों में मानव को अखिलेश की सर्वोत्कृष्ट कृति कहा गया है। मानव अपनी बौद्धिक, मानसिक तथा चारित्रिक विशेषताओं के कारण सर्वश्रेष्ठ है। केवल मनुष्य ही उचित-अनुचित का निर्णय कर सकता है तथा अपने चरित्र के बल पर समाज को नई दिशा दे सकता है। समाज में उसकी प्रतिष्ठा का आधार कुछ मानवीय मूल्य थे जो केवल उसी में पाए जाते हैं। कहा भी है – ‘येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञान न शीलं न गुणो न धर्म: ते मृत्युलोके भुवि भारभूता मनुष्य रूपेण मृगाश्चरिन्त।’

परोपकार, दया, करुणा, मैत्री, सत्यनिष्ठा आदि चारित्रिक विशेषताओं के आधार पर समाज में मनुष्य की प्रतिष्ठा थी। बुद्ध, महावीर स्वामी, विवेकानंद, दयानंद, बाबा आमटे तथा प्रेमचंद जैसे अनेक उदाहरण इस बात का प्रमाण हैं कि केवल धन ही मनुष्य की प्रतिष्ठा का आधार नहीं होता। आज स्थिति बदल गई है। आज के युग में भौतिकता का बोलबाला है। नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, प्रदर्शनप्रियता ही जीवन-शैली बन गई है। आज दुर्भाग्य से मनुष्य की प्रतिष्ठा का आधार मानवीय गुण न होकर धन-संपत्ति हो गए हैं। जिस व्यक्ति के पास धन-संपत्ति का अभाव है वह गुणी होते हुए भी समाज में आदर नहीं पाता। आज समाज में धनी की पूजा होती है। उसी का रुतबा है तथा हर जगह उसी की पूछ है। इससे बड़ी आश्चर्य की बात क्या हो सकती है कि धार्मिक स्थलों पर भी धनी का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आज हमारी सोच एवं दृष्टिकोण इस हद तक दूषित हो चुके हैं कि नैतिक मूल्य नगण्य हो गए हैं। समाज में जिस प्रकार छल-कपट, बेईमानी, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, तस्करी, कालाबाजारी जैसी बुराइयाँ बढ़ती जा रही हैं उसके लिए कहीं-न-कहीं धन का प्रभाव दृष्टिगोचर होता है।

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