ICSE Hindi Specimen Paper 2023 Sec-B EKANKI SANCHAY Class 10

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ICSE Hindi Specimen Paper 2023 Sec-B EKANKI SANCHAY Class 10

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ICSE Hindi Specimen Paper 2023 Sec-B EKANKI SANCHAY Class 10

(EKANKI SANCHAY) एकांकी संचय

Board ICSE
Class  10th (x)
Subject Hindi
Topic Specimen Paper Solved
Syllabus Revised Syllabus
Session 2022-23
Sec-B (EKANKI SANCHAY) Que-14 ,15,16

एकांकी संचय (EKANKI SANCHAY)

Question 14: Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए

मैं जानती हूं, मेरे ही तो बच्चे है। माया ममता किसी को छू नहीं गई है। हर बात में देश, धर्म और कर्तव्य की दुहाई देना उन्होंने सीखा है।

(संस्कार और भावना- विष्णु प्रभाकर)

(i) वक्ता अपने बेटों के विषय में क्या जानती है

उत्तर – अविनाश को हैजा हो गया था 10 दिन से ऑफिस नहीं गया था किंतु उसे या किसी को भी नहीं बताया वह अपनी सास से पूछती है कि क्या उन्हें अपनी बीमारी का पता नहीं चला था। इस पर वक्ता कहती है कि पता चलने पर भी वह किसी को बताने वाला नहीं था, क्योंकि अपनी बीमारी को लेकर बैठना या उससे भयभीत होना उसे नहीं आता था। अपने बेटों की यह विशेषता मै बहुत अच्छी तरह से जानती थी।

(ii) माय़ा ममता किसी को छू नहीं गई है। इस कथन का क्या आशय है

उत्तर – मां के बेटों की विशेषता थी कि वह अपने व्यक्तीगत कस्टो की चर्चा किसी से भी नहीं करते थे। इस विषय में अपने दिल को बहुत कठोर बना लिया था। वह अधिक मोह ममता के बंधन में नहीं फसते थे। तभी तो अविनाश ने अपनी बीमारी की सूचना मॉ को भी नहीं दी थी।

(iii) बेटे हर बात मे किस की दुहाई देते हैं और यह उन्होनें किस से सीखा है

उत्तर – बेटे हर बात में देश, धर्म और कर्तव्य की दुहाई देते थे। उनके अनुसर उनको व्यक्तीगत समस्याएँ इसे बढ़ाकर नहीं हो सकती व्यक्तिगत परेशानियो में मनुष्य को कमजोर नहीं पड़ना चाहिए यह उन्होने अपने पिता से सिखा था।

(iv) अतुल के पिता का चरित्र चित्रण करें।

उत्तर – वक्ता ने बेटों के पिता के विषय में बताया की उनके पिता को भी घर का मोह छू नहीं गया था। उनका छोटा बेटा बचपन में जब बहुत बीमार हो गया था, और उसके बचने ने कि कोई आशा नहीं रह गई थी तो ऐसे समय पर वे तनिक भी विचलित नहीं हुए बल्कि शांत मन से उसे धरती पर लीटाने के लिए समान हटा रहे थे। इसे ग्यात होता है कि उनके पिता अपनी व्यक्तीगत परेशानियां में विचलित नहीं होते थे सदैव देश, धर्म, और कर्तव्य के विषय में ही सोचा करते थे। अपने जीवन का उद्देश्‍य उन्होने यही बना रखा था।

Question 15: Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए

मुझे और लज्जित ना करों। मैरी चोट का इलाज बेटी की ससुराल वालों ने दूसरी चोट से कर दिया है।

                                                                                                (

(i) मुझे और लज्जित ना करों किसने कहा उस का संक्षिप्त परिचय लिखिए।

उत्तर – उक्त वाक्य जीवन लाल ने कहा है। जीवन लाल एक धनी व्यापारी है और अपनी बहू कमला के मायके से इच्छा अनुसार दहेज ना मिलने के कोरण वह उसको मायके के लिए विदा नहीं करता। वह बहू और बेटी में बहुत फर्क करता है। अपनी बेटी उसे बहुत प्यार है किंतु अपनी बहू की भावनाओं को सम्मान नहीं देता। ऊपर से उसे प्रताड़ित भी करता है। घटना क्रम के अनुसार अंत में उसकी आंखें खुलती है और उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है।

(ii) मेरी चोट से क्या आशय है उसने ऐसा क्यो कहा

उत्तर – वक्ता जीवन लाल दहेज कम मिलाने के कारण अपनी बहू को विदा नहीं कर रहा था वह अपनी बहू के यहां से उसकी इच्छा अनुसार दहेज न मिलने से अपने ऊपर चोट मानता है और प्रमोद से दहेज रुपी मरहम की मांग करता है। उसे इस बात का बहुत घमंड था अपनी बेटी को बहुत दहेज दिया है इसलिये उसकी बेटी के ससुराल वाले उसकी बेटी की विदाई बड़े मान सम्मान से करेंगे, किंतु जब उनका बेटा रमेश अपनी बहन को ससुराल से बिना लिए वापस लौट कर आया तो उन्‍हें बहुत चोट लगी। और उससे उक्‍त वाक्‍य कहे।

(iii) जीवन लाल के मन में पश्चाताप का भाव कब पैदा हुआ

उत्तर – जीवन लाल की बेटी के ससुराल वालों ने जीवनलाल को जो चोट दी उससे उसका हृदय परिवर्तन कर दिया। पहले वह अपनी बहू के मायके वालों से दहेज रुपी मरहम की मांग करता है किंतु या चोट उसकी आंखें खोल देती है, और वह महसूस करता है कि इस चोट ने मरहम का काम किया है। उसके मन में बहू और बेटी में अंतर मनाने की भावना समाप्‍त हो जाती है, और वह बिना कुछ लिए खुशी खुशी अपनी बहू को मायके भेजने के लिए तैयार हो जाता है।

(iv) इस अवतरण के आ्रधार पर एकांकी के उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – एकांकी से हमें संदेश मिलता है की बहू और बेटी मैं कोई फर्क नहीं होता क्योंकि दुसरे की बेटी जो हमारे घर बहू बनकर आई है तो हमारे घर की बेटी भी किसी दूसरे के घर बहू बनकर गई है। अत: बहू बेटी एक समान ही होने चाहिए बहू की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और दहेज जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से उखड़ कर फेंक देना चाहिए

Question 16: Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए

ना बेटा, मैं अपने जीते जी यह सब ना होने दूंगा। तुम चिंता ना करों। मैं सबको समझा दूंगा।

(सूखी डाली- उपेंद्र नाथ अश्क )

(i) वट वृक्ष को देखकर दादा जी के मन में कौन-सी कल्पनाए जाग जाती है?

उत्तर – वट वृक्ष को देखकर दादाजी के मन में अपने इस बड़े परिवार की कल्पना ये जाग जाती है इस परिवार में दादाजी सहित 4 पीढीयां रहती हैं। इनके अपने व्यक्तिगत और विचार हैं। उनमें विरोध है किंतु वे आपस में प्रेम के अनुशासन में बंध कर रहेते हैं। दादाजी चाहते हैं कि यह सब कुछ उनके जीवन में चलता रहे।

(ii) दादाजी का मन क्या सोच कर सिहर उठता है वे किस चिंता में डूबे है?

उत्तर – दादा जी का मन यह सोच कर सिहर उठता है कि उनका परिवार बिखर न जाये और यहीं सोच कर वे चिंता में डूबे थे।

(iii) दादा जी कैसे विचारों के व्यक्ति है उनकी क्या अभिलाषा है?

उत्तर – दादा जी एक बुध्दिमान और मधुर विचारों के व्यक्ति है और उनकी अभिलाषा है कि उनका परिवार एक वट वृक्ष की तरह संयुक्त रूप से रहे।

(iv) अपनी छोटी बहु के विषय में दादा जी क्या विचार है?

उत्तर – दादाजी का छोटी बहू के विषय में विचार है कि, वह संपन्न और सभ्य परिवार की संतान है वह शिक्षित और अनुभवी है, अपने परिवार में सभी पर शासन करते रहने के कारण नए परिवार और परिस्थिति में वह स्वयं को स्थापित करने में आरंभ में कुछ कठिनाई का अनुभव करती है दादाजी का विचार है कि इस दशा में सम्मान और सहानुभूति दे कर हम बहू का मन सरलता से जीत सकते हैं।

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